ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना
भूखी प्यासी मैं दिन भर की बेकरार
छलनी से करूँगी साजन का दीदार
शर्म लाल होंगे तब मेरे रुखसार
पिया मिलन में देर न लगा जाना
ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना

 

मेहंदी रचे हाथ, सजे कंगन के साथ
पूजा का थाल, और ले करवा हाथ
मांगूगी तुमसे रहे सजना सदैव साथ
लंबी उम्र का वर, पिया को दे जाना
ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना

मेरा साज-श्रृंगार सब साजन से हैं
बिखरा जीवन मे प्यार साजन से है
घर और परिवार सब साजन से है
सातों जन्म के साथ का वर दे जाना
ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना

माना भूख से मैं न अकुलाऊंगी तब
पर, पिया की बेचैनी मैं सह पाऊँगी कब
मेरे प्रिय पिलाये मुझे अधर सुधा जब
बादलों में तुम छुप जाना, पर पहले....
ऐ चाँद तुम जल्दी से आ जाना।

प्रिया वच्छानी
उल्हासनगर/मुम्बई

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