डिजिटल पेमेंट पर कंज्यूमर को इन्सेंटिव देने का फैसला टला, समिति अगली बैठक तक सिफारिशें देगी

जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार को हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कंज्यूमर को 100 रुपए तक इन्सेंटिव देने के प्रस्ताव पर विचार किया। हालांकि, इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। शुगर सेस लगाने पर भी कोई फैसला नहीं हुआ। इन पर विचार के लिए दो समितियां बनाई जाएंगी। काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि दो दिन में समितियों का गठन हो जाएगा। शुगर सेस की समिति दो हफ्ते में रिपोर्ट देगी। डिजिटल ट्रांजैक्शन की समिति को अगली बैठक तक सिफारिशें देनी होंगी। काउंसिल की यह 27वीं बैठक थी।

इन्सेंटिव 100 रुपए से ज्यादा नहीं होगा

- जेटली के मुताबिक, डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वालों को जीएसटी रेट में 2% छूट का प्रस्ताव है। सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी, दोनों में 1-1% छूट मिलेगी। यह उन प्रोडक्ट पर लागू होगा जिन पर टैक्स 3% या ज्यादा है। चेक से पेमेंट करने वाले कंज्यूमर को भी छूट मिलेगी। हालांकि, प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 100 रुपए छूट का ही प्रावधान है।

जेटली ने बताया कि कुछ राज्य इसमें निगेटिव लिस्ट यानी ऐसे प्रोडक्ट की लिस्ट चाहते हैं, जिन पर छूट नहीं मिलेगी। इस पर विचार के लिए 5 सदस्यों वाली समिति बनाने का फैसला हुआ।

चीनी पर सेस तय करने के लिए भी समिति बनेगी
- बैठक में चीनी पर 5% जीएसटी के अलावा शुगर सेस लगाने और एथनॉल पर 18% रेट को घटाने का भी प्रस्ताव रखा गया।

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि ज्यादातर राज्य अलग सेस के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे सिर्फ गन्ना उत्पादन करने वाले 5 राज्यों को फायदा होगा। अगर इसे मंजूरी मिली तो दूसरे राज्य भी अपनी जरूरत के हिसाब से सेस लगाने की मांग करेंगे। चीनी की उत्पादन लागत अभी 35 रुपए जबकि एक्स-मिल कीमत 26-28 रुपए किलो है। इसलिए मिलों पर गन्ना किसानों का 20,000 करोड़ रुपए बकाया हो गया है।

- बुधवार को कैबिनेट ने गन्ना किसानों को 5.5 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 1,540 करोड़ रुपए सब्सिडी देने का फैसला किया था। शुगर सेस से इसकी भरपाई होगी।

Related Post

Close Menu