वॉलमार्ट का होने से पहले 13 कंपनी खरीद चुकी है फ्लिपकार्ट, स्नैपडील के लिए लगाई थी 5000 करोड़ कीमत

देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट, दुनिया की तीसरी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी वॉलमार्ट के हाथों बिकने जा रही है। हालांकि इससे पहले फ्लिपकार्ट अपने से छोटी 13 कंपनियों अधिग्रहण कर चुकी है या उनके अधिकांश शेयर अपने नाम कर चुकी है। यह सिलसिला उसने स्थापना के 3 साल बाद यानी 2010 में ही शुरू कर दिया था। वह स्नैपडील को खरीदने के प्रयास भी कर चुकी है। फ्लिपकार्ट ने स्नैपडील को खरीदने के लिए 70-80 करोड़ डॉलर (4500-5000 करोड़ रुपए) कीमत लगाई थी। वहीं कभी 6 अरब डॉलर की कीमत रखने वाली स्नैपडील के मालिक कम से कम 1 अरब डॉलर चाहते थे। ऐसे में डील नहीं हो सकी।

अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने बुधवार 9 मई को फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की योजना का खुलासा किया था।

- मॉर्गन स्टैनली ने 2016 में फ्लिपकार्ट की कीमत 2015 के 15.2 अरब डॉलर के मुकाबले घटाकर 5.54 अरब डॉलर कर दिया था। इसी बीच कंपनी को वॉलमार्ट से ऑफर मिला, जिसे उसकी वैल्यूएशन को 2.8 अरब डॉलर आंका।

- हालांकि अब फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी निवेशक जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक अपनी 22% हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने पर असमंजस में है।

- वह इस हिसाब-किताब में व्यस्त है कि उसे हिस्सेदारी बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ेगा। वह यह विचार कर रही है कि भविष्य में यदि फ्लिपकार्ट ने अच्छी ग्रोथ की तो उसका शेयर बेचने का फैसला गलत साबित हो सकता है।

- इससे यह डील संकट में फंस सकती है, क्योंकि सॉफ्टबैंक पीछे हटा तो वॉलमार्ट सिर्फ 55 फीसदी हिस्सेदारी का ही सौदा करेगा।

वॉलमार्ट के साथ एमेजॉन भी फ्लिपकार्ट को खरीदने की दौड़ में शामिल था। उसने वॉलमार्ट की 20.8 अरब डॉलर (1.39 लाख करोड़ रुपए) की तुलना में फ्लिपकार्ट की वैल्यू 22.5 अरब डॉलर आंकी थी।

- मगर रेगुलेटर्स की ओर से क्लीयरेंस की आसानी को देखते हुए फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट से करार किया।

- एमेजॉन ने भारत आने से पहले 2012 में भी फ्लिपकार्ट को खरीदने का प्रयास किया था। तब 50 से 70 करोड़ डॉलर की पेशकश की थी। भारत आने के बाद 2015 में भी एमेजॉन 8 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट को खरीदने की इच्छा जताता रहा। हालांकि वह हर बार नाकाम रहा।

- फ्लिपकार्ट से मुकाबले के लिए एमेजॉन ने अपनी भारतीय यूनिट में पिछले 4 साल में 19511 करोड़ रुपए निवेश किए हैं।2017 में पालतु जानवरों से जुड़े प्रोडक्ट बेचने वाली फ्लोरिडा की ई-कॉमर्स कंपनी को एरिजोना की पेटस्मार्ट कंपनी ने खरीदा था। 3.35 अरब डॉलर में सौदा हुआ।
- 2016 में वॉलमार्ट ने अमेरिका की ही ई-कॉमर्स फर्म जेट.कॉम को खरीदा था। 3.30 अरब डॉलर में सौदा हुआ।
- 1999 में अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सेप एरिबा ने ई-कॉमर्स कंपनी ट्रेडेक्स को खरीदा था। 1.86 अरब डॉलर में सौदा हुआ।
- 2000 में लिटावर टेक्नोलॉजीस नामक एक कंपनी ने एशियानेट के 100 फीसदी ई-कॉमर्सबिजनेस का अधिग्रहण किया था। 1.20 अरब डॉलर में सौदा हुआ।
- 2009 में दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने अमेरिका के एक ऑनलाइन फैशन ब्रैंड जेपोस.कॉम को खरीदा। 1.13 अरब डॉलर में सौदा हुआ।

कंपनीशुरुआतसंस्थापकरोजाना ऑर्डर
फ्लिपकार्ट2007सचिन बंसल-बिन्नी बंसल5 लाख
एमेजॉन इंडिया2013जेफ बेजॉस4.5 लाख
पेटीएम मॉल2017वीएस शर्मा50 से 55 हजार
मिंत्रा2007अनंत नारायण (सीईओ)45 से 50 हजार
स्नैपडील2010कुणाल बहल तथा रोहित बंसल45 हजार
सालकंपनी
दिसंबर 2010वीरीड.कॉम (किताबों की जानकारी देने वाला प्लेटफॉर्म)
अक्टूबर 2011माइम-360 (डिजिटल म्यूजिक स्टोर)
नवंबर 2011चकपक.कॉम (बॉलीवुड न्यूज साइट)
फरवरी 2012लेट्सबाय. कॉम (इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर)
मई 2014मिंत्रा (लाइफस्टाइल रिटेलर)
सितंबर 2014एनजीपे (पेमेंट प्लेटफॉर्म)
नवंबर 2014जीव्स (कस्टमर सर्विस)
मार्च 2015एडइक्विटी (मोबाइल एडवर्टाइजिंग कंपनी)
अप्रैल 2015एपइटरेट (मोबाइल मार्केटिंग फर्म)
सितंबर 2015एफएक्स मार्ट (पेमेंट प्लेटफॉर्म स्टार्ट अप)
अप्रैल 2016फोनपे (यूपीआई आधारित पेमेंट स्टार्टअप)
जुलाई 2016जबॉन्ग (फैशन एंड लाइफस्टाइल रिटेलर)
अप्रैल 2017ईबे (कंज्यूमर टू कंज्यूमर सेल्स)

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