अजमेर। शहर में चल रहे सीवरेज के कार्य के दौरान कई बालश्रमिक काम करते हुये देखे गये, जिनसे कम दर में कठोर श्रम कार्य करवाया जा रहा है। वही दूसरी ओर सरकार बाल श्रम रोकने के लिये कई प्रयास कर रही है।
बाल श्रम पर नये कानून को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दी थी। और किसी भी काम के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त करने वाले व्यक्ति को दो साल तक की कैद की सजा तथा उस पर 50,000 रुपये का अधिकतम जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि, स्कूल से बाद के समय में अपने परिवार की मदद करने वाले बच्चे को इस कानून के दायरे में नहीं रखा गया है. नया कानून 14 से 18 साल की उम्र के किशोर को खानों और अन्य ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटकों जैसे जोखिम वाले कार्यों में रोजगार पर पाबंदी लगाता है.
राष्ट्रपति ने बाल श्रम (प्रतिबंध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के जरिए बाल श्रम (प्रतिबंध एवं नियमन) अधिनियम 1986 में संशोधन किया गया है। ताकि किसी काम में बच्चों को नियुक्त करने वाले व्यक्ति पर जुर्माना के अलावा सजा भी बढ़ाई जा सके।
संशोधित कानून सरकार को ऐसे स्थानों पर और जोखिम भरे कार्यों वाले स्थानों पर समय समय पर निरीक्षण करने का अधिकार देता है जहां बच्चों के रोजगार पर पाबंदी है. इस सिलसिले में एक विधेयक को लोकसभा ने 26 जुलाई को पारित किया था जबकि राज्यसभा ने उसे 19 जुलाई को पारित किया।
संशोधित अधिनियम के जरिए इसका उल्लंघन करने वालों के लिए सजा को बढ़ाया गया है. बच्चों को रोजगार देने वालों को अब छह महीने से दो साल की जेल की सजा होगी या 20,000 से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों लग सकेगा। पहले तीन महीने से एक साल तक की सजा और 10,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान था।
दूसरी बार अपराध में संलिप्त पाए जाने पर नियोक्ता को एक साल से लेकर तीन साल तक की कैद की सजा का प्रावधान किया गया है. कानून के मुताबिक किसी भी बच्चे को किसी भी रोजगार या व्यवसाय में नहीं लगाया जाएगा. हालांकि स्कूल के समय के बाद या अवकाश के दौरान उसे अपने परिवार की मदद करने की छूट दी गई है।  लेकिन फिर भी बाल श्रमिको का आंकडा बढता ही जा रहा है। वही दूसरी ओर अजमेर स्थित मानव तस्करी यूनिट प्रभारी रविकांत दरिया ने बताया कि कई बच्चो को हमने बाल श्रम करते हुये मुक्त भी करवाया है, कई लोगो के खिलाफ थानो में मामले भी दर्ज करवाये है।
यह अनुचित या शोषित माना जाता है यदि निश्चित उम्र से कम में कोई बच्चा घर के काम या स्कूल के काम को छोड़कर कोई अन्य काम करता है। किसी भी नियोक्ता को एक निश्चित आयु से कम के बच्चे को काम पर रखने की अनुमति नहीं है। न्यूनतम आयु देश पर निर्भर करता किसी प्रतिष्ठान में बिना माता पिता की सहमति के न्यूनतम उम्र १६ वर्ष निर्धारित किया है।
बहुत से गरीब परिवार अपने बच्चों के मजदूरी के सहारे हैं। कभी कभी ये ही उनके आय के स्रोत है। इस प्रकार का कार्य अक्सर दूर छिप कर होता है क्योंकि अक्सर ये कार्य औद्योगिक क्षेत्र में नहीं होतें है। बाल श्रम कृषि निर्माण और शहरो के अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, बच्चों के घरेलू काम में योगदान भी महत्वपूर्ण है।
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