अजमेर। राजस्थान माध्यमिक षिक्षा बोर्ड व सीबीएसई से जुडी संदर्भ पुस्तक में स्वराज मेरा जन्मसिद् अधिकार है मैं इसे लेकर ही रहूंगा का नारा बुलंद करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अलग पहचान रही है और जब भी देष भक्ति की बात आती है तो उनका नाम बडे अदब और हमेषा बडे सम्मान के साथ नाम लिया जाता है। लेकिन राजस्थान माध्यमिक षिक्षा बोर्ड और सीबीएसई से जुडी एक संदर्भ पुस्तक में पाठ 22 राष्ट्ीय आंदोलन के पेज नम्बर 158 व 159 पर अग्रवाद का जनक बताया है।

किताब में यह भी लिखा है राजनितीक आंदोलन का तिलक ने मार्ग दिखाया इस लिये उनको उग्रवाद का जनक कहा जाता है। पुस्तक में छपे इस विवादित अंष को लेकर निजी स्कूल एसोसिएषन के प्रदेषाध्यक्ष कैलाष शर्मा ने बताया कि आठवी कक्षा की पुस्तक में जो लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के बारे में उग्रवाद जैसे शब्दो का वर्णन किया जा रहा है तो हमारे लिये एक दुर्भाय पूर्ण बात है। इस तरह पाठ्यक्रम में कुछ फेर बदल करने से पहले इतिहास व विषेषज्ञो से राय लेनी चाहिये।


शीर्षक मे जुडे पाठ में इतिहासकार डाॅ नवलकिषोर उपाध्याय कहा गया है कि तिलक ने राष्ट्ीय आंदोलन में उग्र प्रदर्षन का मार्ग अपनाया इसके चलते उन्हें आतंक ‘‘ उग्रवाद’’ का जनक कहा जाता है। उनका मत था कि ब्रिटिष अफसरो के सामने गिडगडाने से कुल हासिल होने वाला नही है। ऐसे में षिवाजी एवं गणपति उत्सव के सहारे तिलक ने देष में जागृति पैदा की है। उन्होने ने जनमानस में स्वाधीनता की आवाज को पुरजोर बुलंद किया और ब्रिटिष सरकार की आंखो में सदा चुबते थे।

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