अजमेर-महान् सूफी संत हजरत ख्वाजा गरीब नवाज़ रह. की प्रबन्ध कमेटी, दरगाह कमेटी, दरगाह ख्वाजा साहब की बहुप्रष्ठित और प्राचीन सम्पत्ति चिश्ती चमन सराए, वाके स्टेशन रोड़ के स्वामित्व को लेकर दरगाह कमेटी के मुख्यकार्यकारी अधिकारी एवं नाज़िम ने अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर की आयोजित 12वीं बैठक दिनांक 30 अप्रेल 2018 के पारित प्रस्ताव को चुनौती देते हुए, चिश्ती चमन सराए, पर दरगाह कमेटी का स्वामित्व बताया है और कहा है कि अजमेर विकास प्राधिकरण को किसी भी प्रकार से जमीन को चिन्ह्ति कराने का अधिकार नही है। चिश्ती चमन सराए एक वक्फ सम्पत्ति है और केन्द्रीय अधिनियम दरगाह ख्वाजा साहब एक्ट 1955 की धारा 3 (क्) (पपप), के तहत दरगाह कमेटी की अचल सम्पत्ति कहीं भी स्थित हो, वह दरगाह एण्डाउमेन्ट का भाग है। आज भी सम्वत् 2020 की जमाबंदी में यह सम्पत्ति दरगाह ख्वाजा साहब, अजमेर की दिखा रखी है।

दरगाह ख्वाजा साहब, अजमेर लगभग आठ सदियों से अजमेर शहर में स्थापित है। जो चैहानों से लेकर मुगलकाल एवं बिट्रिश काल से लेकर आज़ादी तक और वर्तमान में दरगाह ख्वाजा साहब से सम्बन्धित दर्जनों सम्पत्तियां अजमेर शहर और देश के विभिन्न्ा हिस्सों मंे स्थित है। इसी में एक चिश्ती चमन सराए, अजमेर रेल्वे स्टेशन के नजदीक स्थापित है। जिसका खसरा नम्बर 4500 मिन रकबा 3 बीघा 18 विस्वा है, जो ए.एम.सी 16/550 सम्पत्ति वर्ष 1886 से दरगाह कमेटी के रिकार्ड में दर्ज है। 1947 के बाद सम्पत्ति अजमेर आने वाले जाएरीन की सुविधा के लिए उपयोग होती थी, समय के साथ चिश्ती चमन सराए सम्पत्ति पर दरगाह कमेटी, दरगाह ख्वाजा साहब, अजमेर द्वारा दुकानदारों को किराएदार बनाया और वर्तमान में तकरीबन 90 किराएदार काबिज़ है, जो निरन्तर रूप से दरगाह कमेटी को अपना मासिक किराया जमा करवाते है। जिसमे सभी के किराएनामें सम्पादित है।

दरगाह कमेटी के पास नगर निगम अजमेर से स्वीकृत मानचित्र, विभिन्न् न्यायालयों के निर्णय, किराएदारांे के किराएनामंे मौजूद है जिसमें सभी ने दरगाह कमेटी, दरगाह ख्वाजा साहब अजमेर को ही चिश्ती चमन सराए का स्वामी माना है। वर्तमान में उत्पन्न्ा परिस्थितयों के लिए नाज़िम का कहना है कि कुछ किराएदारों के विरूद्ध माननीय न्यायलय से डिक्री पारित हो चुकी है वह अपने किराएशुुदा परिसर में का कब्ज़़ा बनाए रखने के लिए व आमजन की भावनाओं व सरकारी महमको को झूठे बयानो व गलत दस्तावेज़ के आधार पर बाहर व्यक्तियों से साथ मिलकर, चिश्ती चमन सराए की सम्पत्ति पर अपना कब्ज़ा बनाए रखना चाहते है। जबकि यह स्पष्ट है कि चिश्ती चमन सराए दरगाह एण्डोमेन्ट का भाग है।

दरगाह कमेटी को इस बात का बड़ा आश्चर्य है कि अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर ने किस आधार अपनी बैठक में अनुशंसा कर उपरोक्त भूमि का चिन्ह्किरण और किराया वसूल करने का उल्लेख किया है। समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशन के पश्चात् नाज़िम दरगाह कमेटी ने अपने अभिभाषक द्वारा अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर को नोटिस प्रस्तुत कर, अपने स्वामित्व के दस्तावेज़ो के आधार पर ताकिद की है कि  दिनांक 30 अप्रेल 2018 की बैठक में चिश्ती चमन सराए के पारित प्रस्ताव को शून्य, स्थगित और अप्रभावी घोषित करे।

दरगाह कमेटी के पास उपलब्ध पुख्ता दस्तावेज व आदेशः-
  • सराय चिश्ती चमन नगर परिषद, अजमेर के रिकाॅर्ड में दरगाह की सम्पत्ति है, इस संबंध में कार्यालय अजमेर परिषद, अजमेर का एक पत्र दिनांक 05.06.1971 का स्वीकृत मानचित्र।
  • न्यायालय कमिश्नर, अजमेर मेरवाड़ा, अजमेर का निर्णय जो केस सं. 209/1886 ’जमनादास बनाम मीर अमीरअली मुतवल्ली, में पारित निर्णय। इस निर्णय के विरूद्ध श्री कमिश्नर द्वारा डिस्ट्रिक्ट जज, अजमेर मेरवाड़ा के समक्ष अपील सं. 47/1886 प्रस्तुत हुई और उसमें भी दिनांक 30 दिसम्बर, 1886 को उक्त निर्णय को सही मानते हुए अपील खारिज की गई।
  • अपर जिला न्यायाधीश सं. 2, अजमेर द्वारा दीवानी अपील नं. 81/1985 (44/1977) मंदिर श्रीबालाजी उर्फ चतुरभुज सूरज कुड बनाम दरगाह कमेटी, अजमेर का निर्णय दिनांक 17 जुलाई, 1994।
  • 1947 के बाद दरगाह कमेटी द्वारा ठेके पर दिये जाने वाला ठेका नामा।
  • सराय चिश्ती चमन का जो पूर्व में गृहकर नगर निगम को दिया जाता रहा है, उनकी सरीदे।
  • पुराने किरायेदारों द्वारा दरगाह कमेटी के पक्ष में लिखे गये किरायेनामे।माननीय जिला कलक्टर के आदेश क्रमांक  3711 दिनांक 25 फरवरी 2004, के अनुसार आदेश की शर्त एवं निर्बन्ध संख्या 6 के अनुसार यह आदेश यदि किसी प्रकार का वैद्य हक है अथवा हक अर्जित होने योग्य है तो यह आदेश उसको प्रभावित नही करेगा।
  • इसके अतिरिक्त भी दरगाह कमेटी के पास स्वामित्व से सम्बन्धित दर्जनों दस्तावेज उपलब्ध है।
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