2018 के चुनावों को लेकर राजस्थान में अभी से सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सभी पार्टियां चाहती हैं कि 2018 के विधानसभा चुनावों में वह जोरदार वापसी करें. जिस तरीके के चुनाव पिछले लोकसभा और विधानसभा के रहे थे और नतीजे नरेंद्र मोदी के पक्ष में आए थे तो उससे भारत की अधिकतर राजनीतिक पार्टियां हैरान रह गई थी।वहीं कई भारत की राजनीतिक पार्टियां ऐसी भी है जिनका अस्तित्व जैसे कि खतरे में आ गया है !  ऐसे में साल 2018 के चुनाव उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। अगर 2018 के चुनावों में कांग्रेस, बहुजन समाजवादी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां एक होकर चुनाव लड़ती हुई नजर आ रही है तो इसके पीछे एक मुख्य कारण उनका डर भी है। सभी पार्टियां जानती हैं कि अगर वह अलग-अलग होकर चुनाव लड़ेंगे, तो इससे बहुत बड़ा फायदा नरेंद्र मोदी और बीजेपी को होने वाला है। 
 
यही कारण है कि सभी पार्टियां एक तीसरा दल बनाती हुई नजर आ रही हैं। जो अगले विधानसभा चुनाव में एक साथ होकर नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी को हराने की कोशिश करता हुआ नजर आएगा।वही आपको बता दें कि  जनता का मन भी कुछ हद तक तो इस समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खत्म हो गया है. इस मोह के खत्म होने का एक जो सबसे महत्वपूर्ण कारण है वह यही यह है कि जिस तरीके से नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने देश के ऊपर जीएसटी थोपा है, तो उससे लोगों का आम जीवन और छोटे छोटे काम भी खतरे में पड़ गए हैं।इस समय देश की अर्थव्यवस्था बेशक सरकारी आंकड़ों में बड़ी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है लेकिन जीएसटी का सीधा -सीधा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।जिन्होंने नरेंद्र मोदी से प्रोत्साहन लेकर अपना स्टार्टअप काम शुरू किए थे। इस समय उनके स्टार्टअप बंद होने की कगार पर खड़े हुए हैं और किसी भी तरीके की सरकारी मदद छोटे कामगारों को सरकार करती हुई नजर नहीं आ रही है।
 
यह एक ऐसा कारण है जो शायद 2018 के विधानसभा चुनावों में एक बहुत बड़ा मुद्दा बनने वाला है. विपक्ष जानता है कि अगर इस मुद्दे को भुना लिया जाए तो 2018 में चुनाव के अंदर मोदी और बीजेपी को हरा कर फिर से राजस्थान की सत्ता में वापसी की जा सकती है।नरेंद्र मोदी की सरकार ने युवाओं के लिए जिस तरीके से रोजगारों की बात और वादे पिछले चुनाव के समय किए थे तो उन चुनाव में वादे पूरे नहीं हुए हैं. निश्चित रूप से जीएसटी के बाद अगर कोई मुद्दा छाया हुआ है तो रोजगार है। रोजगार भी एक कारण हो सकता है जो वह अगले आम चुनावों में बीजेपी के विजय रथ को रोकता हुआ नजर आ सकता है. देखना होगा कि किस तरीके से जीएसटी और रोजगार के मुद्दे को विपक्ष भुना पाता है। राजस्थान का विपक्ष अगर इन दोनों मुद्दों के ऊपर सही तरीके से अपनी राय नहीं रख पाता है और जनता को विश्वास में नहीं ला पाता है तो निश्चित रूप से यह है विपक्ष की हार मानी जाएगी। 
 
ललित भाटी -पूर्व मंत्री कांग्रेस :- 
 
राजस्थान में आगामी दिनो में होने वाले चुनाव को लेकर #मधरूधराटाईम्स टीवी के संवाददाता पुष्पेन्द्र सिंह राठौड से हुई विशेष बातचीत के दौरान कहा कि कर्नाटक चुनाव का राजस्थान मे कोई असर नहीं पडेगा। क्योकि कर्नाटक मे सिद्दरमैया से राज्यपाल की नहीं बनती है और चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने वहा के लोगो को जातिवाद में बांटकर कुछ मतदाताओ को अपने पक्ष किया था और राजस्थान में जब ओला वृष्टि व फसल ख़राब होने के दौरान भाजपा सरकार ने किसानो की सुध नहीं ली और रही सही कसर नोट बंदी व जीसएसटी ने आमजन व छोटे मोटे व्यापारियो की कमर तोड कर रख दी। जिसके कारण लोगो मे भारी आक्रोष है। वहीे दूसरी ओर प्रदेश की सीएम व पार्टी हाईकमान से पटरी मेल नही खाने के कारण आज राजस्थान में भाजपा बिना प्रदेशाध्यक्ष के बैठी हुई है, यह बडे दुर्भाग्य की बात है। 
नीरज जैन -भाजपा पार्षद :- 
 
कर्नाटक में हुये चुनाव का असर राजस्थान में भी होगा, क्योकि चुनाव देश के पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम पर लडा जा रहा है, अब तक 6 राज्यो में चुनाव हो चुके है, उनमें भाजपा ने पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई है आगामी चुनावो में राजस्थान की बागडोर भी वर्तमान सीएम राजे के ही हाथो में होगी, लेकिन चुनाव मोदी के नाम पर लडा जायेगा। जीएसटी व नोटबंदी का कोई असर नही होगा आगामी चुनावो में क्योकि नोटबंदी के बाद 6 राज्यो में भाजपा सरकार बना चुकी है। 
 
वरिष्ठ पत्रकार ज़ाकिर हुसैन :- 
 
कर्नाटक चुनाव पर हमसे ख़ास बातचीत में कहा की कर्नाटक चुनाव के नतीजे काफी बेहतरीन रहे है और अगर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार नहीं बना पाती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में इस बड़ा असर राजस्थान चुनाव में देखा जायगा ! बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ती है लेकिन अब वह कही न कही कम होती नजर आ रही है ! मेघालय ,मणिपुर व गोवा में सरकार तो बनी लेकिन किन परिस्थतियो में बनी यह जनता से छिपा नहीं है तो कही न कही नरेंद्र मोदी का जादू ख़त्म होता जा रहा है ! राजस्थान की जनता में वर्तमान मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल के कुछ नेताओ के खिलाफ भारी गुस्सा है ! इसका इजहार राजस्थान में दो लोकसभा व एक विधानसभा में जनता कर चुकी है ! अगर फिर भी वर्तमान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार चुनाव लड़ती है तो जो कई समाज वर्ग नाराज है इनके वोटो का असर भी सरकार पर पड़ेगा ! क्योंकि राजस्थान का चुनाव पूर्ण रूप से जातिवाद पर लड़ा जाता है और वर्तमान समय में राजस्थान की मुख्यमंत्री से हर समाज वर्ग के लोग नाराज दिख रहे है ! 
 
वरिष्ठ पत्रकार क्षितिज गौड़ :- 
 
कर्नाटक चुनाव का कुछ असर राजस्थान में पडेगा ही क्योंकि सबसे ज्यादा असर पडेगा उत्साह पर चाहे वो बीजेपी के कार्यकर्ता हो या फिर कांग्रेस के ,वैसे मोदी लहर तो 2014 के चुनाव के बाद ख़त्म हो चुकी है ! लेकिन मोदी प्रभाव अभी भी काम कर रहा है अभी तक जिन भी राज्यों में चुनाव हुए है उनमे दो चेहरे ही काम कर रहे है नरेंद्र मोदी और अमित शाह ,राजस्थान में भी इन्ही दो चेहरों पर चुनाव लड़ा जायगा ! हिन्दी भाषी क्षेत्रों में राजस्थान एक अहम् राज्य है तो राजस्थान में नोटबंदी और जीएसटी का असर पूर्ण रूप से देखने को मिलेगा ,राजस्थान में अभी तक तीसरा मोर्चा बन नहीं पाया है और यह लगता नहीं है इतना जल्दी तीसरा मोर्चा बन पाएगा ! 
 
 
 
                                           

 

Close Menu