अजमेर। राजस्थान प्राईवेट एज्युकेशन महासंघ अजमेर का विशाल भव्य और ऐतिहासिक अविधवेशन गत 16 मई को बारा में हुये महाअधिवेशन में प्रदेश  के निजी शिक्षण संस्थाओ के संचालको की समस्याओ पर अधिवेशन में चर्चा की गई।
राजस्थान प्राईवेट एज्युकेशन महासंघ अजमेर के प्रदेशाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने बताया कि कोटा संभाग के बारा में आयोजित हुये प्रांतीय निजी षिक्षण संस्थाओ के संचालको का एक अधिवेशन आयोजित किया गया था, जिसमें माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा अस्थाई को समाप्त कर केवल सम्बद्वता ही जारी की जाये एवं आन लाईन पोर्टल तब तक नही भरवाये जाये जब तक सभी
 शिक्षण संस्थाओ की स्थाई, अस्थाई मान्यता 2017 तक जारी न हो जाये। बोर्ड द्वारा स्थाई व अस्थाई मान्यता के नाम पर जो 15-15 हजार रूपये लिये जा रहे है उसे बंद किया जाये, सिर्फ सम्बद्वता के नाम पर ही एक बार शुल्क रखा जाये।
कैलाश शर्मा ने कहा कि बोर्ड द्वारा अन्य प्रमाण पत्र या अंक तालिका जारी करने से पूर्व संम्बधित विद्यालयो से एनओसी मंगवाई जाये, क्योकि विद्यार्थी द्वारा विद्यालय का शुल्क  बकाया होने के कारण विद्यार्थी डुप्लीकेट अंकतालिका बोर्ड से प्राप्त कर लेता है। जिसके कारण विद्यालय के लाखो रूपये की फीस डूब जाती है।
शर्मा ने कहा कि सरकार एक्ट 1989 मे  संषोधन करने जा रही है। 1989 अधिनियम में सहायता प्राप्त अनुदानित शिक्षण संस्थाओ के लिये लिया था, लेकिन बाद में सरकार ने नियमो में सरलीकरण करने के लिये 1984 अधिनियमो में  मान्यता शब्द जोडकर प्रदेश की सभी  निजी शिक्षण संस्थाओ को सरकार द्वारा 1989 अधिनियम में छूट दे दी गई को समाप्त कर 1994 अधिनियम के दौरान शीतलता दे दी गई, लेकिन उसे यथावत रखा जाये। संस्था के प्रदेशाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रांतीय अधिवेशन में इन सभी मुद्दो पर विचार विमश हुआ और कहा कि अगर सरकार इन मांगो को जल्द से जल्द से नही मानेगे तो उग्र आंदोलन किया जायेगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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