अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी थमने का नाम नहीं ले रही है. गुरुवार को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे की गिरावट के साथ 70.15 के स्तर पर बंद हुआ.एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और चीन में ट्रेड वार बढ़ने के बीच ऑयल इम्पोर्टर्स द्वारा डॉलर की डिमांड बढ़ी, जिससे रुपए पर दबाव बना. वहीं अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. आपको बता दें कि इस साल अभी तक रुपया 10 फीसदी टूट चुका है. वहीं इस महीने रुपया 2.51 फीसदी टूटा है.

रुपये में गिरावट क्यों - एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तुर्की में आर्थिक संकट से भी दुनियाभर की करेंसी पर निगेटिव असर है.यूरोपीय करंसी में भी स्लोडाउन आने से अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आ रही है. डॉलर इंडेक्स 15 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया है. इसके अलावा देश के व्यापार घाटे ने भी रुपये पर दबाव बनाने का काम किया है. अब रुपये के 71-72 तक स्तर तक लुकढ़ने की बातें होने लगी है. इस साल अब तक रुपये में करीब 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है.

आम आदमी पर क्या होगा असर
> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

रुपए में गिरावट चिंताजनक नहीं-सरकार ने रुपये में गिरावट के लिए विदेशी कारणों को जिम्मेदारी बताया है. इकोनॉमिक अफेयर्स सेकेट्री सुभाष चन्‍द्र गर्ग ने कहा, विदेशी कारण आगे चलकर सामान्य हो जाएंगे.

इस महीने रुपया 2.51 फीसदी टूटा-रुपए ने बीते साल डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी, जो अब 2018 की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है. इस साल अभी तक रुपया 10 फीसदी टूट चुका है. वहीं इस महीने रुपया 2.51 फीसदी टूटा है.

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