रूस से करीब 39,000 करोड़ रुपये के एस-400 सौदे को रोकने के लिए अमेरिका भारत को किफायती दाम पर अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए मनाने की कोशिश कर सकता है.

गौरतलब है कि 6 जुलाई को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिकी शहर वाशिंगटन में रहेंगी, जहां इंडो-यूएस 2+2 डायलॉग होने जा रहा है.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, इस बात की प्रबल संभावना है कि इस दौरान टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के बारे में बातचीत हो. यह एक ऐसा उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम है जो लॉन्ग रेंज के मिसाइल के हमले को रोकने में खास तौर से प्रभावी है.

दूसरी तरफ, रूस का एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम बड़े हवाई हमलों, खासकर एफ-18 और एफ-35 जैसे लड़ाकू विमानों से होने वाले हमलों को रोकने में कारगर है. रूस में बने एस-400 के नवीनतम संस्करण से भी लॉन्ग रेंज के हमलों को रोका जा सकता है, लेकिन इस बात पर विचार करना है कि इंटरमीडिएट और इंटरकॉन्ट‍िनेंटल बैलिस्ट‍िक मिसाइल के खिलाफ क्या यह अमेरिकी THAAD से ज्यादा प्रभावी है.

रूस से यह सौदा करीब 39,000 करोड़ का हो सकता है और इसे रोकने के लिए ऐसा लगता है कि ट्रंप प्रशासन सक्रिय हो गया है. यह सौदा अमेरिका के लिए राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो गया है. अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक पर बहस हो रही है जिसका उद्देश्य अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना है. यही नहीं, इन कंपनियों से खरीदारी करने वाली दूसरे देशों की कंपनियों को भी इस प्रतिबंध में शामिल करने का प्रस्ताव है.

यही नहीं, ट्रंप प्रशासन ने भारत जैसे देशों को कुछ रियायत देने की भी पेशकश की है, बशर्ते कि रूस से हथियार खरीद पर निर्भरता घटाई जाए.

 

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