कोटखाई प्रकरण: वैज्ञानिक जांच से कातिल तक पहुंची सीबीआइ

शिमला, रमेश सिंगटा। गुडिय़ा दुष्कर्म एवं हत्या मामले में सीबीआइ वैज्ञानिक जांच के सहारे कातिल तक पहुंची। गुडिय़ा के साथ दांदी के जंगल में दरिंदगी हुई थी। हालांकि अभी इस मामले में और कडिय़ों को भी जोड़ा जा रहा है लेकिन अब तक की जांच ने कम से कम हलाइला निवासियों को सुकून दिया है। सीबीआइ के एसपी एसएस गुरुम और जांच अधिकारी डीएसपी रैंक की अधिकारी सीमा पाहुजा की टीम ने करीब नौ महीने तक दिन रात एक किया। इनकी तहकीकात ने पुलिस की गुडिय़ा केस की पहली कहानी भी झूठी साबित कर दी है। गुडिय़ा मामले में आरोपित सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या के बाद मूल प्रकरण ने खाकी की साख पर फिर से संकट खड़ा कर दिया है।

आरोप है कि पुलिस ने तत्कालीन सरकार की वाहवाही लूटने के लिए कथित आरोपितों के साथ थर्ड डिग्री इस्तेमाल किया। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सीबीआइ की एसआइटी नए आरोपित तक पहुंची। पुलिस के हाथों पकड़े गए सभी आरोपितों में से एक भी आरोपित नहीं निकला है। अब सवाल यह है कि गुडिय़ा के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था या नहीं, इसकी कडिय़ां जोडऩे का कार्य अभी शेष है। इसीलिए जांच एजेंसी ने आरोपित की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया है।

हलाइला के बागवान अनंत राम नेगी ने कहा कि सीबीआइ ने पूरे गांव पर लगा कलंक धो दिया है। पुलिस ने उन्हें सोमवार को सीबीआइ से मिलने नहीं दिया। हम तो जांच एजेंसी के शुक्रगुजार हैं कि हमारे गांव के बेटों को बचा लिया। इस बात का दुख है कि सूरज की मौत हो गई। मैने शुरू में ही कहा था कि राजू समेत पुलिस ने जो भी आरोपित पकड़े हैं, वे बेगुनाह हैं। जांच में यह साबित हो गया है।

टाली के धार त्रिपनु गांव के सहपाठियों ने बताया कि उन्होंने गुडिय़ा को पिछले साल चार जुलाई को दोपहर बाद साढ़े चार बजे स्कूल में देखा था। तब वह सहेली के साथ खड़ी थी। वे दोनों दुकान के पास सामान लेने आए थे। इसके बाद वे टूर्नामेंट देखने चले गए। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें कुछ मालूम नहीं है। ये दोनों महासू स्कूल के ही छात्र थे। इनमें से एकछात्र उस स्कूल में उसी दिन आया था। बाद में ये उस स्कूल में शिफ्ट हो गए थे जो पूर्व सरकार ने गुडिय़ा के नाम से अपग्रेड किया था। इन छात्रों को सोमवार को सीबीआइ ने पूछताछ के लिए बुलाया था। इनके साथ इनके अभिभावक भी थे। इनमें से एक छात्र की मां व दूसरे छात्र केपिता दांदी जंगल में आए थे। उन्हें सीबीआइ ने बुला रखा था। वे दो घंटे पैदल चल घर से आए थे। तब तक सीबीआइ बानकुफर से शिमला जाने की तैयारी में थी। इस कारण इनसे पूछताछ नहीं हो पाई। छात्रों और उनके अभिभावकों के मुताबिक गुडिय़ा के कातिलों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआइ जल्द सच जनता के सामने लाएगी

महासू स्कूल के करीब 12 बच्चे दांदी से होकर अपने घर जाते थे। इनमें गुडिय़ा अकेली छात्रा थी। दांदी में वे आराम कर पानी पीते थे। वहां साथ में चिरानियों के डेरे भी थे लेकिन उनसे कोई बात नहीं होती थी। पानी के नल के पास कई बार चिरानी कपड़े भी धोते थेसूरज का डेरा राजू के डेरे के साथ ही था। सूरज की कोटखाई के थाने में पुलिस हिरासत में हत्या हो गई थी। उसकी पत्नी ममता शिमला में महिला आश्रम में रह रही है। अब सूरज के डेरे में ताला लगा हुआ है। इन डेरों के साथ सड़क के नजदीक गुडिय़ा का शव बरामद हुआ था। जिन आरोपितों को पुलिस ने पकड़ा था, उनमें से आशीष चौहान, राजू व सुभाष जमानत पर जेल से बाहर आ गए पर लोकजन व दीपक अभी भी जेल में ही हैं। इन दो को कोई  जमानती नहीं मिल रहे हैं।

चिरानी के पकड़े जाने से पुलिस द्वारा गुडिय़ा मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए राजू की मां के चेहरे पर चमक आ गई है। बेसरू उर्फ केसरी की नजर में सीबीआइ उनके लिए भगवान बनकर आई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके बेटे को इतना पीटा कि ठीक ढंग से चल फिर भी नहीं सकता है। मैं तब चीखी चिल्लाई पर उस समय पुलिस ने कोई भरोसा नहीं किया। बेटे पर एक नहीं दो हत्याओं के इल्जाम लगाए। सूरज तो राजू का भाई जैसा था, वह उसे क्यों मारता? मारा पुलिस वालों ने और इल्जाम लगाया मेरे बेटे के सिर पर। ऐसा जुर्म किया, तभी तो नौ पुलिस वाले जेल में बंद हैं। केसरी जिंदादिल महिला है। अकेले जंगल में ढारे में बेटे पर लगे झूठे आरोप को सहती रहीं।वह कहती हैं, 'मैं मर क्यों नहीं गई? छह साल पहले कैंसर से ठीक हो गई थी लेकिन बेटे के गम से फिर बीमार कर दिया। सीबीआइ ने मेरे साथ मां जैसा बर्ताव किया।' गुडिय़ा को पूरा इंसाफ मिलेगा जो मिलना शुरू हो गया है। पुलिस को तो पाप लगेगा। मेरे बेटे को मार-मार कर अपाहिज बना दिया। थाने में रस्सी के सहारे उल्टा टांगा और मारपीट की

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