आरएसएस की कथित मानहानि करने के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को भिवंडी कोर्ट में पेश हुए जहां कोर्ट ने तय किया कि आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत मुकदमा चलेगा.

कोर्ट में पेशी के दौरान राहुल गांधी ने खुद को बेकसूर बताया. उनके इस बयान के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है.

राहुल गांधी ने 6 मार्च, 2014 को महाराष्ट्र के भिवंडी इलाक़े में एक चुनावी रैली में आरएसएस पर महात्मा गांधी की "हत्या" में शामिल होने का आरोप लगाया था.

इस बयान के बाद संघ की भिवंडी इकाई के सचिव राजेश कुंटे ने राहुल के ख़िलाफ मानहानि का मामला दाख़िल किया था.

अदालत से निकलने के बाद राहुल गांधी ने बूथ लेवल कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, एयरपोर्ट से वो सीधे भिवंडी कोर्ट पहुंचे थे, जहाँ उनकी पेशी हुई.

कोर्ट से निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "मेरे ऊपर (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) ये केस लगाते रहते हैं, जितने भी लगाएं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है. मेरी विचारधारा की लड़ाई है और मैं इनके ख़िलाफ़ लड़ूंगा और हम जीतेंगे."

वहीं राहुल गांधी की पेशी से पहले उनके वकील नारायण अय्यर ने कहा कि "इतिहास को बदला नहीं जा सकता है. हम केस के संदर्भ में उचित समय पर उचित तथ्य कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे."

दूसरी तरफ राजेश कुंटे ने मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी को कोर्ट में पेशी के दौरान वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, "मैं शिकायतकर्ता हूं पर मुझे बिना जांच के अंदर जाने नहीं दिया गया लेकिन राहुल गांधी और उनके साथियों को बिना जांच प्रक्रिया के कोर्ट के अंदर जाने दिया गया."

साल 2014 में भिवंडी में रैली को संबोधित करते हुए कहा था, "आरएसएस के लोगों ने गांधीजी को गोली मारी और आज उनके लोग गांधीजी की बात करते हैं."

इस बयान पर आरएसएस की भिवंडी इकाई ने विरोध जताया था. इकाई के सचिव राजेश कुंटे ने कहा था कि राहुल गांधी ने अपने भाषण के जरिए संघ की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिश की थी.

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