हिंदू संस्कृति, हिंदुस्तान की धड़कन है. इसलिए ये साफ़ है कि अगर हिंदुस्तान की सुरक्षा करनी है तो पहले हमें हिंदू संस्कृति को संवारना होगा'

'ये याद रखा जाना ज़रूरी है कि ताक़त संगठन के ज़रिए आती है. इसलिए ये हर हिंदू का कर्तव्य है कि वो हिंदू समाज को मज़बूत बनाने के लिए हरसंभव कोशिश करे.'

'संघ इसी लक्ष्य के लिए काम कर रहा है. देश का मौजूदा भाग्य तब तक नहीं बदल सकता, जब तक लाखों नौजवान इस लक्ष्य के लिए अपना जीवन नहीं लगाते. इसी के प्रति युवाओं की सोच को बदलना संघ का परम लक्ष्य है.'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वेबसाइट पर जब आप उसका विज़न और मिशन जानने जाएंगे तो वेब पेज पर सबसे ऊपर यही लिखा है.

और ये बात किसके हवाले से कही गई है? जवाब है आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार बलिराम हेडगेवार.

ये वो नाम है जो कुछ दिनों से ख़ास चर्चा में चल रहा है. वजह? पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पहले संघ के कार्यक्रम में जाने का न्योता स्वीकार करना और फिर वहां भाषण देना.

गुरुवार शाम प्रणब ने भाषण से पहले डॉ हेडगेवार के निवास का दौरा किया और विज़िटर बुक में लिखा, ''मैं आज यहां भारत मां के महान सपूत डॉ के बी हेडगेवार को श्रद्धांजलि देने आया हूं.''

जैसे ही उन्होंने ये लिखा, ये पन्ना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद प्रणब के भाषण की भी काफ़ी चर्चा हुई.

लेकिन उसके बारे में काफ़ी बातें हो चुकी हैं. यहां बात उस शख़्स की, जिनके निवास पर पूर्व राष्ट्रपति गए और जिन्होंने संघ को खड़ा किया.

डॉ केशव बलिराम हेडगेवार कौन थे, कहां से आते हैं, उन्होंने संघ को कैसे खड़ा किया, उनके मुताबिक इसकी क्या ज़रूरत थी, इन सभी सवालों के जवाब तलाशने ज़रूरी हैं.

इस कहानी की शुरुआत 22 जून 1897 को होती है. इस तारीख़ को रानी विक्टोरिया की ताजपोशी की 60वीं सालगिरह थी. लेकिन आठ साल का एक बच्चा शांत, दुखी था.

उस बालक ने समारोह में हिस्सा नहीं लिया और घर लौट गया. घर पहुंचकर मिठाई फेंकी और एक कोने में बैठ गया.

बड़े भाई ने पूछा, ''केशव, क्या तुम्हें मिठाई नहीं मिली.''

जवाब आया, ''मिली थी. लेकिन इन अंग्रेज़ों ने हमारे भोंसले ख़ानदान को ख़त्म कर दिया. हम इनके समारोह में कैसे हिस्सा ले सकते हैं?''

इस किस्से का ज़िक्र एक किताब डॉ हेडगेवार, द एपक मेकर में किया गया है. ये बायोग्राफ़ी बी वी देशपांडे और एस आर रामास्वामी ने तैयार की और संपादन किया है एच वी शेषाद्री ने.

हेडगेवार परिवार मूल रूप से तेलंगाना के कांडकुर्ती गांव का रहने वाला था, लेकिन. 1 अप्रैल, 1889 को जब केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ तो वो नागपुर में बसा था. उन्हें आगे चलकर डॉक्टरजी भी कहा गया.

साल 1925 में संघ की नींव रखने वाले डॉक्टर हेडगेवार का जन्म बलिराम पंत हेडगेवार और रेवती के घर हुआ. परिवार कोई ख़ास समृद्ध नहीं था.

जब केशव 13 बरस के थे, तो प्लेग की वजह से उनके माता-पिता का निधन हो गया. उनके बड़े भाई महादेव पंत और सीताराम पंत ने उनकी पढ़ाई-लिखाई का ख़्याल रखा.

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