जगन्नाथपुरी उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी दूरी पर स्थित हिन्दुओं का आस्था का बहुत ही बड़ा स्थल है. यह मंदिर भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है और चार धामों में से एक है. पुराणों में इस मंदिर को धरती का बैकुंठ कहा गया हैं. इस मंदिर को श्रीक्षेत्र, श्रीपुरूषोत्तम क्षेत्र, शाक क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरि और श्री जगन्नाथपुरी कहा जाता है. उड़ीसा की धार्मिक नगरी पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर है. यहां प्रत्येक अषाढ़ महीने ( जून-जुलाई) में विसाल रथयात्रा का आयोजन किया जाता है. आज इस लेख में हम आपको जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रोचक और अद्भुत तथ्यों के बारे में बता रहे है।

 

1-भगवान जगन्नाथ का अद्भुत स्वरुप पुरी के अतिरिक्त किसी और जगह देखने को नहीं मिलता है. यहां भगवान विष्णु की प्रतिमाएं नीम की लकड़ी से बनी हुई हैं। कहा जाता है कि यह एक बाहरी खोल मात्र होता है। इसके भीतर स्वयं भगवान श्री कृष्‍ण उपस्थित होते हैं।

2-मंदिर की चोटी पर स्थित ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।

3-पुरी में कहीं से भी देखने पर मंदिर के ऊपर लगा सुदर्शन चक्र सदैव अपने सामने ही नजर आएगा। इसे नील चक्र भी कहा जाता है। यह अष्टधातु का बना है।

4-पूरी में स्थित भगवान जगन्‍नाथ का मंदिर 3 बार टूट चुका है। 1174 ईस्वी में ओडिसा शासक अनंग भीमदेव ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। मुख्‍य मंदिर के आसपास लगभग 30 छोटे-बड़े मंदिर स्थापित किए थे।

5-मंदिर में प्रसाद को विशेष तरीके से बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए 7 बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है फिर लकड़ी जलाकर प्रसाद को बनाया जाता है। सबसे ऊपर वाले बर्तन का प्रसाद पहले पकता है फिर उसके बाद क्रमवार नाचे वाले बर्तनों का पकता है।

6-समुद्र किनारे दिन के समय हवा जमीन की ओर एवं रात को इसके विपरीत चलती है परंतु पुरी में इसका उलटा होता है।

7-इस मंदिर के मुख्य गुंबद की छाया जमीन पर नहीं पड़ती।

8-पूरी में श्रीकृष्ण को जगन्नाथ कहते हैं। जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र (बलराम) और बहन सुभद्रा विराजमान हैं। तीनों की ये मूर्तियां काष्ठ की बनी हुई हैं।

9-कहा जाता है कि मंदिर में हजारों के लिए बना प्रसाद लाखों भक्त कर सकते हैं फिर भी प्रसाद की कमी नहीं होती है। सारा साल भंडारे भरे रहते हैं।

10- यहां की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या जहाज उड़ता हुआ नहीं देखा गया। जबकि अन्य मंदिरों पर पक्षियों को बैठे हुए देखा जाता है।

11- मंदिर के सिंहद्वार में कदम रखते ही सागर की लहरों की ध्वनि सुनाई नहीं देती परंतु बाहर आते ही ये आवाजें स्पष्ट रुप से सुनाई देती हैं।

12-भगवान जगन्नाथ के दोनो हाथ नहीं हैं, क्‍योंकि भगवान जगन्नाथ का कहना हैं अपना हाथ जगन्नाथ। इसका अर्थ हैं कि केवल ”मैं एक सहारा हूँ जो कुछ करना हैं वह स्‍वंय तुम्‍हे ही करना हैं।”

13- मंदिर के 45 मंजिला चोटी पर लगे ध्वज को एक पादरी प्रतिदिन बदलता है। माना जाता है कि यदि इस ध्वज को एक भी दिन न बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा।

14- यहां विश्व का सबसे बड़ा रसोईघर है। इसमें भगवान जगन्नाथ को अर्पित करने वाले प्रसाद को 500 रसोईए अौर 300 सहयोगियों द्वारा बनाया जाता है।

15- इतिहासकारों के मुताबिक पहले इस मंदिर की जगह एक बौद्ध स्तूप था। जिसमें गौतम बुद्ध का एक दांत रखा गया था। बाद में इसे कैंडी, श्रीलंका भेज दिया गया। जब जगन्नाथ अर्चना ने प्रसिद्धि प्राप्त की थी उस काल में इस धर्म को वैष्णव सम्प्रदाय ने अपना लिया था। ये 10 वीं शताब्दी में हुआ जब उड़ीसा में सोमवंशी राज्य था।

16- सिख सम्राट महाराजा रणजीत सिंह ने स्वर्ण मंदिर, अमृतसर को दिए स्वर्ण से भी अधिक सोना इस मंदिर को दान किया था। उन्होंने अपने अंतिम दिनों में यह वसीयत भी की थी कि विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा, जो कि दुनिया का सबसे अनमोल और सबसे बड़ा हीरा है, मंदिर को दान कर दिया जाए। उस समय ब्रिटिशों द्वारा पंजाब में अधिकार करने से सारी संपति अपने अधिकृत करने के कारण ऐसा नहीं हुआ।

17-महाराजा रणजीत सिंह ने विश्व प्रसिद्धकोहिनूर हीरा इस मंदिर को दान कर दिया था, लेकिन यह सम्भव ना हो सका, क्योकि महाराजा रणजीत सिंह के राज्‍य पर ब्रिटिश ने अपना अधिकार कर लिया था और महाराज रणजीत सिंह की सभी शाही सम्पत्ति जब्त कर ली थी।

18-भगवान जगन्‍नाथ मंदिर का एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित पताका को रोज बदलता है। ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा।

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