मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल लाने के 12 घंटे के अंदर ही उसका सनसनीखेज कत्ल कर दिया गया। प्रदेश की सियासत को हिलाने वाले इस हाईप्रोफाइल मर्डर के पीछे माना जा रहा है कि पूरी प्लानिंग के तहत बजरंगी के खात्मे की जिम्मेदारी वेस्ट यूपी के कुख्यात सुनील राठी को दी गई। असलाह राठी के शूटर रॉबिन ने जेल तक पहुंचाए। जेल के कुछ कर्मचारियों ने इसमें मदद की। रॉबिन फिलहाल फरार है।

मुन्ना बजरंगी की हत्या में सवालों से पर्दा उठना शुरू हो गया है। पुलिस की अभी तक की पड़ताल में पता चला है कि बागपत जेल में काफी पहले से मुन्ना बजरंगी के कत्ल की साजिश रची जा रही थी। इसके लिए सुनील राठी और उसके गुर्गों ने पूरा इंतजाम कर लिया था। करीब एक माह पहले मुलाकात के दौरान राठी ने इसकी जानकारी अपने शूटर रॉबिन को दी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार रॉबिन ही वो कड़ी है, जिसने मुन्ना बजरंगी के कत्ल के लिए दो पिस्टल जेल तक पहुंचाईं। इसके बाद इन पिस्टल को जेलकर्मियों की मदद से अंदर छिपाया गया। हालांकि अभी ये साफ नहीं हो सका कि जेल में ये पिस्टल कैसे दाखिल की गईं, लेकिन कहा जा रहा है कि इसमें जेल कर्मियों ने मदद की। रॉबिन भी फरार है और उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है। रॉबिन के पकड़े जाने के बाद खुलासा हो सकता है कि जेल के अंदर पिस्टल कैसे पहुंचाई गई। सीओ वंदना शर्मा का कहना है कि जेल में असलाह, कारतूस कैसे पहुंचे, इसकी जांच की जा रही है।

राठी का खास है रॉबिन
रॉबिन छपरौली का रहने वाला अपराधी है और सुनील राठी का खास है। राठी के लिए रॉबिन ने पहले भी कई वारदात अंजाम दी हैं। रुड़की जेल के बाहर हुई गैंगवार में भी रॉबिन का नाम सामने आया था। कुछ साल पहले बागपत से जब सुनील राठी का शूटर अमित उर्फ भूरा फरार हुआ था, तब भी रॉबिन और उसका भाई वारदात में शामिल थे। भूरा और रॉबिन पुलिस से एके-47 लूटकर भागे थे।

दो मैगजीन, 22 जीवित कारतूस मिले

बागपत जिला जेल के गटर से मुन्ना बजरंगी की हत्या में प्रयोग की गई पिस्टल के साथ दो मैगजीन और करीब दो दर्जन जीवित कारतूस मिले हैं। ये सभी प्रतिबंधित चीजें जेल में कैसे पहुंचीं, पुलिस इसकी जांच में जुट गई है। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पूछताछ के दौरान सुनील राठी ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल जेल के गटर में फेंकने की जानकारी अधिकारियों को दी थी। पुलिस अधीक्षक ने तभी गटर साफ करने के लिए सफाई यंत्र मंगा लिए थे। सोमवार देररात तक गटर की सफाई चलती रही। इसके बाद वहां से पिस्टल के साथ दो खाली मैगजीन और 22 जीवित कारतूस मिले। पुलिस ने सारा सामान कब्जे में ले लिया।

एक से अधिक पिस्टल का प्रयोग
आधिकारियों को कारतूस के खोखे तो मुन्ना बजरंगी के शव के पास पडे मिले गए थे, मगर पिस्टल ढूंढने में 14 घंटे लग गए। पिस्टल के साथ ही गटर से दो मैगजीन व 22 जिंदा कारतूस मिले तो अफसरों की आंखे फटी रह गई। कहा जा रहा है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए एक से अधिक पिस्टल का प्रयोग किश गया है, मगर कोई भी अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहा है।

दो गेट पार कर गटर में फेंकी पिस्टल
जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या तन्हाई बैरक के सामने की गई। वहां से अहाते के गटर की दूरी करीब 200 मीटर है। तन्हाई बैरक से वहां तक पहुंचने के लिए दो गेट पास करने पड़ते हैं। इन गेटों पर बंदी रक्षक तैनात रहते हैं। अब सवाल यह उठता है कि हत्यारोपी ने वहां पिस्टल और कारतूस कैसे पहुंचाए। कहीं जेल के ही किसी कर्मचारी ने तो इस काम में उसका सहयोग तो नहीं किया, पुलिस प्रशासन इसकी भी जांच करा रहा है

 

 

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