कार्तिक शर्मा - आज होली का त्यौहार है जहाँ देश में सभी जगह होली दहन करने का सबको बेसब्री से इन्तजार है वही ख्वाजा नगरी अजमेर में दरगाह बाजार में होली बनायी गयी है जिसे ख़ास तौर से मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें शरीक हुए !
खादिम एस एफ हशन चिश्ती ने बताया की यह एक ख़ास त्यौहार जिसे हम एक साथ मनाते है और गले लग कर एक दूसरे को इसकी बधाई देते है और इसके साथ ही ऐसा मानना है गुलाल की महक से अजमेर नगरी पूरी खुशनुमा हो जाएगी ! होली दहन में सभी बुराइयाँ इसमें जल जायगी और यह साम्प्रदायिकता की नगरी है जहाँ एक और ख्वाजा साहब की दरगाह है तो दूसरी और विश्व प्रसिद्द ब्रम्हा जी का मंदिर जो की यहाँ के लिए मिसाल पेश करता है !
अनेकता में एकता की मिसाल कायम करते हुए यहाँ के मुस्लिम समुदाय भी हिंदू त्योहारों में शरीक होता है जिस प्रकार मुस्लिम त्यौहार ईद में हिन्दुओ द्वारा भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जाता है और गले लग कर एक दूसरे को बधाई दी जाती है !
क्या है होली त्यौहार

होली का इतिहास

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए ताकत पाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा। इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, लेकिन होली से होलिका की मौत की कहानी जुड़ी है। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

लेकिन रंग होली का भाग कैसे बने?

यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का यह तरीका लोकप्रिय हुआ। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।
होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं। होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहते हैं।

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