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अजमेर।  विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह की एक परंपरा आयात-ए-करीमा को दरगाह नाज़िम द्वारा कुछ दिनों पहले तोढ़ दिया गया था, जो की आज अंजुमन सेक्रेटरी सैयद वाहिद हुसैन चिश्ती, ख्वाजा साहब के गद्दीनशीन सैयद फख़र काज़मी चिश्ती साहब, अंजुमन यादगार के सदर शैखज़ादा अब्दुल जर्रार चिश्ती और ग़रीब नवाज़ सूफी मिशन सोसाइटी के अध्यक्ष शेखज़ादा ज़ुल्फिखार चिश्ती की मेहनत से फिर से शुरू की गयी।
ज्ञात हो की दरगाह नाज़िम आई बी पिरज़्यादा, व आदिल द्वारा दरगाह की एक परंपरा आयात-ए-करीमा को अपनी नासमझदारी की वजह से बंद करवा दिया था, बल्कि दरगाह शरीफ में किसी भी व्यक्ति(व्यक्तियों) को इबादत करने से रोकना ग़लत है और किसी भी किस्म की कुरान की तिलावत, मीलाद ख्वानी, या सलातो सलाम पढ़ने का अधिकार है, लिहाज़ा कोई भी इबादत करने से किसी को भी रोक नहीं सकता। इस बात को लेकर कई दिनों से खुद्दामे ख्वाजा साहब में आक्रोश था, जिसको लेकर माहौल ख़राब हो चूका था, क्योंकि ये एक दरगाह से जुडी परंपरा है इसको कोई तोढ़ नहीं सकता, और ये आने वाले जायरीनों के लिए दुआ का सबब है।
अंजुमन सेक्रेटरी सैयद वाहिद हुसैन चिश्ती, ख्वाजा साहब के गद्दीनशीन सैयद फख़र काज़मी चिश्ती, अंजुमन यादगार के सदर शैखज़ादा अब्दुल जर्रार चिश्ती ग़रीब नवाज़ सूफी मिशन सोसाइटी के अध्यक्ष शैखज़ादा ज़ुल्फिखार चिश्ती, सैयद राग़िब चिश्ती(अधिवक्ता) शैखज़ादा इस्लाम मोहम्मद आशु चिश्ती इत्यादि लोगों ने फिर से ये परंपरा कानूनी कार्रवाई कर शुरू करवाई।
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