राजस्थान के स्कूलों में बच्चों को संस्कारित करने के लिए अब हर महीने उनकी दादी-नानी को बुलाया जाएगा और संतों के प्रवचन कराए जाएंगे। यह व्यवस्था जुलाई से शुरू हो रहे नए सत्र से लागू की जाएगी। राजस्थान का माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के शिविरा पंचांग नामक कैलेंडर में स्कूलों में हर माह की जाने वाली गतिविधियों का विवरण होता है।इसी पंचांग में कहा गया है कि हर महीने के पहले शनिवार को किसी महापुरुष के जीवन का प्रेरक प्रसंग बताया जाएगा। दूसरे शनिवार को शिक्षाप्रद प्रेरक कहानियों का वाचन व संस्कार सभा होगी। इस संस्कार सभा में बच्चों की दादी-नानी को बुलाया जाएगा और वे बच्चों को परंपरागत कहानियां सुनाएंगी।तीसरे शनिवार को स्कूलों में किसी समसामायिक विषयों की समीक्षा और किसी महापुरुष या स्थानीय संतों के प्रवचन कराए जाएंगे। चौथे शनिवार को महाकाव्यों पर प्रश्नोत्तरी, पांचवें शनिवार को प्रेरक नाटक का मंचन व विद्यार्थियों की ओर से राष्ट्रभक्ति गीत गायन होगा !

 

सभी स्कूलों पर होगा लागू कार्यक्रम की बाध्यता-

प्रदेश के सभी सरकारी, गैर सरकारी, सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों, अनाथ बच्चों के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों, विशेष प्रशिक्षण शिविरों और शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालयों के लिए भी लागू की गई है।

हो सकता है विवाद-

राजस्थान में शिक्षा विभाग पहले ही पाठ्यक्रम में बदलाव, सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता और अन्य मामलों को लेकर भगवाकरण के आरोप झेल चुका है। अब इस नए आदेश को लेकर भी विवाद होना तय माना जा रहा है।शिक्षा विभाग के अधिकारी इसे बच्चों को संस्कारित करने का प्रयास बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस की उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने कहा है कि सरकार पहले ही पाठ्यक्रम में बदलाव कर शिक्षा के भगवाकरण का प्रयास कर चुकी है। अब संतों के प्रवचन द्वारा यह एक और नया प्रयास है।

पूर्व मंत्री ललित भाटी ने इस पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री से यह सवाल किया कि उनके शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में राजस्थान के छात्र छात्राओं का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाया है, बौध्दिक विकास नहीं हो पाया, उनको संस्कार वान नहीं बना पाया, इसका एहसास मंत्री महोदय को अब जाकर हुआ है, वर्तमान शैक्षिक वातावरण बच्चों को संस्कारवान नहीं बना पाया है l पूर्व मंत्री ललित भाटी ने कहा कि शिक्षा मंत्री जी का मूल्यांकन यह तो बेहद गंभीर एवं चिंतनीय है l कही शिक्षा मंत्री अपरोक्ष रूप से ऎसा पाठ्यक्रम बनाकर नागपुर का एजेंडा विद्यालय परिसर में तो लागू करके अपने नंबर बढ़ाने का काम तो नहीं कर रहे क्योंकि इससे पहले भी उनके कई फैसलों में शिक्षा के भगवाकरण की झलक मिलती रही है l इसी क्रम में उन्होंने गण वेश के रंग का चयन कर, लागू करे! शिक्षा मंत्री जी से ये जरुर राजस्थान के समस्त छात्र छात्राओं और अभिभावकों की जिज्ञासा है कि अब कौन से संत विद्यालयों में जाकर प्रवचन देंगे? उनके चयन के लिए सरकार ने कौन से माप दंड तय किया है? क्योंकि वर्तमान में कुछ ऎसे उदाहरण समाज के सामने आ रहे हैं कि इनको अनुकरणीय तो कतई  नहीं माना जा सकता l

पूर्व मंत्री ललित भाटी ने यह जानना चाहा कि शिक्षा मंत्री जी पुरातन गुरुकुल विद्यालयों में, सभी स्कूलों  को बदलने का आदेश मध्य शिक्षा सत्र में देकर वर्तमान विद्यालय व्यवस्था के ताबूत में अपनी अंतिम कील ठोकने का मौका तो नहीं ढूंढ रहे

जब इस मामले में शिक्षा राज्यमंत्री देवनानी से बात करनी चाही, लेकिन उन्होने किसी प्रकार कोई जवाब नही दिया।

महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल ने कहा कि अब स्कूलो में नया सर्कुलर जारी हुआ है, जिसमें जुलाई माह से ही सरकारी स्कूलो में दादा-दादी, नानी कहानिया सुनायेगे, जिससे बच्चे नियमित स्कूल आयेगे और आत्मीयता बढेगी। संतो के प्रवचन वाले सवाल का जवाब देते हुये भदेल ने कहा कि हमारे यहां सभी संत को एक जैसे नही होते और एक दो की वजह से किसी अन्य संतो पर अंगूली नही उठा सकते है और षिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया यह सर्कुलर बहुत अच्छा।

वही दूसरी पुष्कर विधानसभा के पूर्व विधायक डाॅ श्रीगोपाल बाहेती ने कहा कि लोकसभा उपचुनाव में जैसे ही भाजपा की हार हुई और षिक्षा मंत्री देवनानी का टिकट कटते हुये नजर आने लगा तो और आरएसएस की दम पर ही वह टिकट लेकर आते है, उसको खुष करने के लिये अब षिक्षा विभाग को भगवाकरण करने पर तुले हुये और कर भी रहे है। साईकिलो व स्कूल यूनिफार्म का कलर भी भगवा कर दिया। अब संतो के प्रवचन के नाम पर सरकारी स्कूलो मे संतो की जगह आरएसएस के प्रचारक होगे और स्कूली बच्चो को संघ की घुटी देना चाहते है। आखिर चार सालो में मंत्री देवनानी को संतो के प्रवचन व दादा-दादी नानी की कहानिया याद क्यू नही आई।

Close Menu